हेलो, दोस्तों मेरा नाम सुनीता है! मेरी उम्र 21 साल है मेरे चुच्चे काफी बड़े बड़े है! एकदम खरबूज के साइज़ के और रंग दूध की तरह गोरा है, देखने में भी 500- 1000 लडकियों पे भारी हूँ, मतलब मेरे आगे अगर 1000 लडकियों को खडी कर दो तो भी उनमे से कोई मेरी जैसी सुन्दर नहीं मिलेगी!
मेरी कमर 31 इंच कि है, और 38 इंच की गांड है, गांड इतनी मुलायम और कोमल है के थोड़ी सी कोई छु भी दे तो दोनों नितम्ब हिलने लगते है, जैसे कोई जैली हो, मेरी गोरी गांड के कुल्हे अगर कोई फैलाये तो उसे हल्की गुलाबी रंग में मेरी गांड का छेद दिखेगा जो किसी बुड्डे के लंड को भी लोहे की तरह सख्त कर दे, मेरी चूत पे बहुत कम बाल है जिसे मै काटने के बजाए सुन्दर डिजाईन में cutting करके सजाना पसंद करती हू,
मै अपनी चूत का बहूत ध्यान रखती हो और हमेशा उसका श्रिंगार करती हूँ, मुझे अपनी गोरी चूत के होटो पर फ्रूट लिपस्टिक हलके गुलाबी रंग में लगाना बहूत पसंद है और नाभि पर भी मै एक रिंग पहनती हूँ,
मेरे निप्पलस भी लम्बे और मोटे है जिसे चूसने में किसी भी लड़के को मज़ा आ जाए!
दोस्तों, मै आपको ये बात बता दूं के मै बिना चुदाई के नहीं रह पाती हूँ, लिखते हुए भी मेरी चूत से रस टपक रहा है और चुच्चिया एक एकदम सख्त हो रखी है, मेरे परिवार में माँ और में पिताजी है, मेरे पिता जी का लंड मुझे बहूत पसंद है वो मुझे 12 साल की उम्र से चोद रहे है, मेरी मेरी माँ और मेरे पिताजी हम तीनो लगभग रोज ही एक दुसरे के साथ मजे करते है,
मेरे घर में हम तीनो हमेशा नंघे ही रहते है, पिताजी का लंड खड़े होने पर 8.5 इंच का हो जाता है, अब आगे कहानी डायलाग में पढ़े-
माँ - बेटी तेरे पिताजी नहा कर निकलने ही वाले होंगे तू जल्दी कर अलमारी से टोवल निकाल दे पानी पोछने के लिए!
सुनीता- ठीक है माँ! (सुनीता जल्दी से कमरे अलमारी से टोवल निकालती है और उसे बेड पर रखती है, इतने में उसके पिताजी बाथरूम से निकल कर कमरे में दाखिल होते है!)
पिताजी- बेटी सुनीता जल्दी से पानी पोछ दे!
सुनीता पिता की तरफ देख कर मुस्कराती है, पिताजी एकदम नन्घे सुनीता के सामने खड़े थे, सुनीता टॉवल लेकर अपने पिताजी के पास आती है और उनके सर पे रखकर बालो को हलके हाथो से पोछती है, और अपने होठो को पिताजी के होटो पर रखकर चूसने लगती है, दोनों की सांसो की गर्मी से दोनों की उत्तेजना बढ़ने लगती है!
सुनीता इतने में बदन के पानी को पोछने के लिए होटो को अलग करते हुए नीचे झुककर बैठ जाती है, अब पिताजी का लोहे की तरह ताना हुआ 8.5 इंच का लंड अपनी बेटी सुनीता के सामने साँप की तरह फुफकारने लगता है, सुनीता जल्दी से बाकी शरीर को पोछकर हाथ बढ़ाकर टॉवल बिस्तर पर रख देती है! और पिताजी का लंड हाथो से पकड़कर उसकी खाल को पीछे करके लंड के सुपारे को बाहर निकालती है!
पिताजी के लंड से एक प्रीकम(लंड का रस) की बूँद लंड से तार बनाते हुए हवा में तैर जाती है, सुनीता ऑय देखते ही मुह खोलकर जीभ से गिरती हुई रस की बूँद को थाम लेती है! हम्म की आवाज निकाल हुए कहती है-
सुनीता- हम्म्म वाओ रोज की तरह बहूत स्वादिस्ट है पिताजी आपके लंड के वीर्य से ही पैदा हुई हूँ और आपके ही लंड का वीर्य और रस पीकर मै इतनी खूबसूरत और जवान हुई हूँ, मै आपके बिना एक पल भी नहीं रहना चाहती हूँ!
सुनीता अपने पिताजी के पेल्हर (लिंग के नीचे लटकने वाले दो बोल्स ) को एक हाथ की हथेली से थामती है और दुसरे हाथ से लंड के साइज़ को हमेशा की तरह नापते हुए लिंग के सुपाडे को अपने दोनों होठो के बीच में लेकर हलके से चूसने लगती है,
लगभग 10 मिनट तक अपने गले तक लंड को ले जाकर चूसने के बाद अचानक सुनीता अपने मुह को थोडा और बड़ा खोलती है!
पिताजी - आह बेटी मजा आ गया अपना मुह और बड़ा खोल में झड़ने वाला हूँ,
सुनीता - जल्दी कीजिये पिताजी कब से इंतज़ार कर रही हू आपके लंड के इस अमृत को पीने के लिए!
और सुनीता के पिताजी एक तेज झटके के साथ अपनी बेटी सुनीता के मुह में गरम वीर्य की पिचकारी छोड़ते हुए कराहने लगते है!
पिताजी- अहह आह्ह बेटी ले ले अपने बाप का रस अपने मुह में पी जा इसे जल्दी से तेरे लिए ही तो रोज बनाता हु इस वीर्य को अपने पेल्हर में.
वीर्य की कुछ बूंदे सुनीता के होटो से होती हुए बाहर टपके लगती है सुनीता झट से अपनी जीभ निकालकर उसे भी पी जाती है!
इतने में माँ कमरे में दाखिल होती है!
माँ- दोनों बाप बेटी का प्यार ख़तम हुआ हो तो अब नाश्ता भी कर लो जल्दी से! मै टेबल पर लगा रही हूँ!
सुनीता - माँ केवल 10 मिनट रुक जाओ! आज की लंड पूजा तो कर लू, तुम बस पूजा की थाली जल्दी से ला दो, आप तो जानती ही है, बिना पिताजी के लंड का रस पिए बिना और उनके लंड की पूजा किये बिना मै कोई काम नहीं करती यहाँ तक के घर से बहार तक नहीं जाती हूँ!
माँ - ठीक है अभी लाती हु!
उसके बाद उनकी माँ एक ग्लास लाकर अपने पति के लंड के आगे रखती है और हाथ जोड़कर कहती है के हे मेरे प्यारे पति के लंड अपना मूत्र हम माँ बेटी को प्रदान कर के अपना आशीर्वाद दे.
सुनीता का पति ग्लास को उठाकर अपने लिंग के आगे लगता है और पेशाब की एक तेज धार अपने लंड से उस गिलास में छोड़ता है कुछ ही सेकंड में ग्लास मूत्र से भर जाता है! और उसे अपनी पेटी को थमाते हुए कहता है!
पिता- लो बेटी अपने पिता के मूत्र का पहला घूंट हर रोज की तरह तुम ग्रहण करो, और फिर अपनी माँ को भी दे दो!
सुनीता जल्दी से ग्लास को थामकर अपने होठो पर लगाते हुए पेशाब को गिलास से एक ही घूंट में आधा खाली कर देती है,
उसे ऐसा करते हुए देखकर उसकी माँ कहती है-
माँ- अरे बेटी आज सारा खुद ही पी जाएगी मेरे लिए भी तो बचा.
सुनीता- माँ क्या करू पिताजी के लंड का मूत्र इतना स्वादिस्ट होता है के छोड़ने का मन ही नहीं करता, मन करता है जब तक पूरा पेट ना भर जाए पीती रहू!
इतने में माँ सुनीता के हाथो से ग्लास अपने हाथो से ग्लास को अपने होठो पर लगा कर एक ही बार में ग्लास को खाली कर देती है.
माँ के ऐसा करते ही बाप बेटी खिलखिला कर हस पड़ते है!
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शेष कहानी यहाँ से पढ़े अगली पोस्ट में --
मेरी कमर 31 इंच कि है, और 38 इंच की गांड है, गांड इतनी मुलायम और कोमल है के थोड़ी सी कोई छु भी दे तो दोनों नितम्ब हिलने लगते है, जैसे कोई जैली हो, मेरी गोरी गांड के कुल्हे अगर कोई फैलाये तो उसे हल्की गुलाबी रंग में मेरी गांड का छेद दिखेगा जो किसी बुड्डे के लंड को भी लोहे की तरह सख्त कर दे, मेरी चूत पे बहुत कम बाल है जिसे मै काटने के बजाए सुन्दर डिजाईन में cutting करके सजाना पसंद करती हू,
मै अपनी चूत का बहूत ध्यान रखती हो और हमेशा उसका श्रिंगार करती हूँ, मुझे अपनी गोरी चूत के होटो पर फ्रूट लिपस्टिक हलके गुलाबी रंग में लगाना बहूत पसंद है और नाभि पर भी मै एक रिंग पहनती हूँ,
मेरे निप्पलस भी लम्बे और मोटे है जिसे चूसने में किसी भी लड़के को मज़ा आ जाए!
दोस्तों, मै आपको ये बात बता दूं के मै बिना चुदाई के नहीं रह पाती हूँ, लिखते हुए भी मेरी चूत से रस टपक रहा है और चुच्चिया एक एकदम सख्त हो रखी है, मेरे परिवार में माँ और में पिताजी है, मेरे पिता जी का लंड मुझे बहूत पसंद है वो मुझे 12 साल की उम्र से चोद रहे है, मेरी मेरी माँ और मेरे पिताजी हम तीनो लगभग रोज ही एक दुसरे के साथ मजे करते है,
मेरे घर में हम तीनो हमेशा नंघे ही रहते है, पिताजी का लंड खड़े होने पर 8.5 इंच का हो जाता है, अब आगे कहानी डायलाग में पढ़े-
माँ - बेटी तेरे पिताजी नहा कर निकलने ही वाले होंगे तू जल्दी कर अलमारी से टोवल निकाल दे पानी पोछने के लिए!
सुनीता- ठीक है माँ! (सुनीता जल्दी से कमरे अलमारी से टोवल निकालती है और उसे बेड पर रखती है, इतने में उसके पिताजी बाथरूम से निकल कर कमरे में दाखिल होते है!)
पिताजी- बेटी सुनीता जल्दी से पानी पोछ दे!
सुनीता पिता की तरफ देख कर मुस्कराती है, पिताजी एकदम नन्घे सुनीता के सामने खड़े थे, सुनीता टॉवल लेकर अपने पिताजी के पास आती है और उनके सर पे रखकर बालो को हलके हाथो से पोछती है, और अपने होठो को पिताजी के होटो पर रखकर चूसने लगती है, दोनों की सांसो की गर्मी से दोनों की उत्तेजना बढ़ने लगती है!
सुनीता इतने में बदन के पानी को पोछने के लिए होटो को अलग करते हुए नीचे झुककर बैठ जाती है, अब पिताजी का लोहे की तरह ताना हुआ 8.5 इंच का लंड अपनी बेटी सुनीता के सामने साँप की तरह फुफकारने लगता है, सुनीता जल्दी से बाकी शरीर को पोछकर हाथ बढ़ाकर टॉवल बिस्तर पर रख देती है! और पिताजी का लंड हाथो से पकड़कर उसकी खाल को पीछे करके लंड के सुपारे को बाहर निकालती है!
पिताजी के लंड से एक प्रीकम(लंड का रस) की बूँद लंड से तार बनाते हुए हवा में तैर जाती है, सुनीता ऑय देखते ही मुह खोलकर जीभ से गिरती हुई रस की बूँद को थाम लेती है! हम्म की आवाज निकाल हुए कहती है-
सुनीता- हम्म्म वाओ रोज की तरह बहूत स्वादिस्ट है पिताजी आपके लंड के वीर्य से ही पैदा हुई हूँ और आपके ही लंड का वीर्य और रस पीकर मै इतनी खूबसूरत और जवान हुई हूँ, मै आपके बिना एक पल भी नहीं रहना चाहती हूँ!
सुनीता अपने पिताजी के पेल्हर (लिंग के नीचे लटकने वाले दो बोल्स ) को एक हाथ की हथेली से थामती है और दुसरे हाथ से लंड के साइज़ को हमेशा की तरह नापते हुए लिंग के सुपाडे को अपने दोनों होठो के बीच में लेकर हलके से चूसने लगती है,
लगभग 10 मिनट तक अपने गले तक लंड को ले जाकर चूसने के बाद अचानक सुनीता अपने मुह को थोडा और बड़ा खोलती है!
पिताजी - आह बेटी मजा आ गया अपना मुह और बड़ा खोल में झड़ने वाला हूँ,
सुनीता - जल्दी कीजिये पिताजी कब से इंतज़ार कर रही हू आपके लंड के इस अमृत को पीने के लिए!
और सुनीता के पिताजी एक तेज झटके के साथ अपनी बेटी सुनीता के मुह में गरम वीर्य की पिचकारी छोड़ते हुए कराहने लगते है!
पिताजी- अहह आह्ह बेटी ले ले अपने बाप का रस अपने मुह में पी जा इसे जल्दी से तेरे लिए ही तो रोज बनाता हु इस वीर्य को अपने पेल्हर में.
वीर्य की कुछ बूंदे सुनीता के होटो से होती हुए बाहर टपके लगती है सुनीता झट से अपनी जीभ निकालकर उसे भी पी जाती है!
इतने में माँ कमरे में दाखिल होती है!
माँ- दोनों बाप बेटी का प्यार ख़तम हुआ हो तो अब नाश्ता भी कर लो जल्दी से! मै टेबल पर लगा रही हूँ!
सुनीता - माँ केवल 10 मिनट रुक जाओ! आज की लंड पूजा तो कर लू, तुम बस पूजा की थाली जल्दी से ला दो, आप तो जानती ही है, बिना पिताजी के लंड का रस पिए बिना और उनके लंड की पूजा किये बिना मै कोई काम नहीं करती यहाँ तक के घर से बहार तक नहीं जाती हूँ!
माँ - ठीक है अभी लाती हु!
माँ बेटी की लंड पूजा
सुनीता की माँ एक थाली में कुछ फूल अगरबत्ती सजाकर थाली में ले कर आती है! और सुनीता को थमा देती है, सुनीता एक अगरबत्ती पैकेट से निकाल कर अपनी चूत में आधा इंच अन्दर अपनी चूत में घुसेड देती है और उसके बाद माचिस से उस अगरबत्ती को जला कर अपनी कमर को हिलाते हुए लंड के सामने उसकी आरती उतारती है,और उसकी माँ भी बगल में नग्न अवस्था में हाथ जोड़कर खड़े होते हुए कुछ फूल उठाती है और लंड के ऊपर चढाते हुए लंड को चूमकर माथे लगाती है!उसके बाद उनकी माँ एक ग्लास लाकर अपने पति के लंड के आगे रखती है और हाथ जोड़कर कहती है के हे मेरे प्यारे पति के लंड अपना मूत्र हम माँ बेटी को प्रदान कर के अपना आशीर्वाद दे.
सुनीता का पति ग्लास को उठाकर अपने लिंग के आगे लगता है और पेशाब की एक तेज धार अपने लंड से उस गिलास में छोड़ता है कुछ ही सेकंड में ग्लास मूत्र से भर जाता है! और उसे अपनी पेटी को थमाते हुए कहता है!
पिता- लो बेटी अपने पिता के मूत्र का पहला घूंट हर रोज की तरह तुम ग्रहण करो, और फिर अपनी माँ को भी दे दो!
सुनीता जल्दी से ग्लास को थामकर अपने होठो पर लगाते हुए पेशाब को गिलास से एक ही घूंट में आधा खाली कर देती है,
उसे ऐसा करते हुए देखकर उसकी माँ कहती है-
माँ- अरे बेटी आज सारा खुद ही पी जाएगी मेरे लिए भी तो बचा.
सुनीता- माँ क्या करू पिताजी के लंड का मूत्र इतना स्वादिस्ट होता है के छोड़ने का मन ही नहीं करता, मन करता है जब तक पूरा पेट ना भर जाए पीती रहू!
इतने में माँ सुनीता के हाथो से ग्लास अपने हाथो से ग्लास को अपने होठो पर लगा कर एक ही बार में ग्लास को खाली कर देती है.
माँ के ऐसा करते ही बाप बेटी खिलखिला कर हस पड़ते है!
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